

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा | होय सिद्धि साखी गौरीसा ||

जो सत बार पाठ कर कोई | छूटहि बन्दि महा सुख होई ||

जय जय जय हनुमान गोसाईं | कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ||

संकट कटै मिटै सब पीरा | जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ||

और देवता चित्त न धरई | हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ||

अन्त काल रघुबर पुर जाई | जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ||

तुम्हरे भजन राम को पावै | जनम जनम के दुख बिसरावै ||

राम रसायन तुम्हरे पासा | सदा रहो रघुपति के दासा ||

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता | अस बर दीन जानकी माता ||

साधु सन्त के तुम रखवारे | असुर निकन्दन राम दुलारे ||