
Sahasra lochana prabhritya sheshalekhashekhara
सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखरप्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखरप्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं।अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशं।। त्रय: शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।

यं डाकिनीशाकिनिकासमाजे निषेव्यमाणं पिशिताशनैश्च। सदैव भीमादिपदप्रसिद्धं तं शंकरं भक्तहितं नमामि।।

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपं। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।